सूरत के अडाजन इलाके की एक 55 वर्षीय महिला से ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ₹73 लाख ठगने का मामला सामने आया है। Times of India की 28 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों ने सरकारी अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल कर महिला को डराया। सूरत साइबर पुलिस ने मामले में FIR दर्ज की है।

आधार के गलत इस्तेमाल का डर दिखाया
रिपोर्ट में शिकायत के हवाले से बताया गया है कि महिला को 30 सितंबर को फोन आया। कॉल करने वालों ने उनके आधार से संदिग्ध मोबाइल नंबर जारी होने की बात कही। इसके बाद गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनसे पैसे माँगे गए।
आरोप है कि महिला से बैंक की बचत के साथ सोने पर लोन लेकर भी रकम ट्रांसफर करवाई गई। उन्हें मामला किसी से साझा नहीं करने के लिए कहा गया।
कब हुई शिकायत?
रिपोर्ट के मुताबिक, महिला ने 21 अक्टूबर को साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत की। पुलिस ने 26 अक्टूबर को FIR दर्ज की। खबर 28 अक्टूबर को प्रकाशित हुई है; घटना उसी दिन की नहीं है।
घटना का स्रोत: Times of India की रिपोर्ट
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‘डिजिटल अरेस्ट’ क्या सच में गिरफ्तारी का तरीका है?
सरकारी जागरूकता संदेश में स्पष्ट किया गया है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ का कोई प्रावधान नहीं है। इस तरह की ठगी में अपराधी पुलिस या जाँच एजेंसी का अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं।
स्क्रीन पर वर्दी, किसी विभाग का नाम या भेजे गए पत्र पर सरकारी निशान देखकर कॉल करने वाले पर भरोसा न करें। उसकी पहचान की पुष्टि स्वतंत्र रूप से करना जरूरी है।
आधिकारिक संदर्भ: PIB का डिजिटल अरेस्ट संबंधी जागरूकता संदेश
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